ज़िंदगी की सरजमीं पर...
Manu Sharad

वक़्त और हम!!!

अलग ही अंदाज़-ए-बयाँ है… क्या ये वक़्त चल रहा है,के वक़्त मुसलसल थमा है,वक़्त के हाथ में आईना है,देखता है कि अक़्स अपना है,सोचता हूं, …

मद्धम मद्धम!!!

ज़िंदगी मद्धम मद्धम सी,गुनगुनाती चली जा रही,सुनते थे हम ख़ामोश बैठे,अकेले में आकाशवाणी,बिना दिए अपनी वाणी, गीतमाला बिनाका की,कार्यक्रम विविध भारती,ग्यारह बजे की सुई,चुप सारी …

नया नया सा!!!

ठंड पड़ रही है,बर्फ़ गिर रही है,सर्द हो के सांसे,धुआं बन रही हैं, हाथों की जुंबिश,नम पड़ रही है,थरथराते होंठों पर,कंपकंपी चढ़ रही है, पानी …

चैन!!!

कल शाम, कल रात से बात हुई,सोचती रही रात मगर नहीं सोयी,वक़्त था तक़रीबन रात के ढाई,अल्लाह दुहाई अल्लाह दुहाई,नींद आ कर भी नहीं आई,सख़्त …

सच झूठ!!!

कितने ही सच, झूठे देखे,बिखरे बिखरे से टूटे देखे,किसी को क्या पता था,किसी ने ख़्वाब सुनहरे देखे… कुछ सच्चे लोग, झूठे देखे,फ़रेबी नहीं थे, फ़रेब …

शुभ दीपावली!!!

ओस किरणों ने आ घेरा,भू, धरा को मचला फेरा,नव प्रभात है ये नव बेला,चिड़ियों ने चहचहा बोला,है जीवन अनूठा अलबेला,कोमल कोपलों पे सूर्य बैठा,क़तरा क़तरा …

करवा!!!

रिश्तों में सबसे अहम रिश्ता,सालाना जन्मदिवस मना रहा,हर औरत बनी है दुल्हन आज,आदमी दूल्हे सा है सज रहा, सुन कर के करवा की कथा,देखो चांद …