ज़िंदगी की सरजमीं पर...
Manu Sharad

नंदिनी : बांवरा मन!!! भाग ९

अमलतास गुलमोहर खिल रहा दिल्ली में,रौशन धूप में खिल रहे थे फूल रंग बिरंगे,ख़ुशनुमा माहौल था उसपर दिन सुनहरे,महरौली में दिखे कींकड जंगल अनोखे,बहुत बड़े …

नंदिनी : उधेड़बुन!!! भाग ८

भाग्य का लिखा कभी टल नहीं सकता,अच्छा है या बुरा ये बस समय को पता,हां जाने अन्जाने ही ये फल है कर्मों का,ग़र शिद्दत से …

नंदिनी : मुलाक़ातें!!! भाग ७

कई दिनों बाद वो थी पहली मुलाक़ात,जितने शांत दिख रहे, थे उतने ही अशांत,कुछ ऐसा बीच दोनों के, जो परे जज़्बात,फिर भी कही ना जा …

नंदिनी : मीठी अनुभूति!!! भाग ६

नंदिनी स्वाभिमानी लगती अभिमानी,उसकी इस ख़ूबी से प्रभावित थे सभी,बस ज़िंदगी में थी तो प्यार की कमी,अपनी इस भावना को नकारती रही,या उसे डर था …

नंदिनी : कुर्ग का ज़िक्र!!! भाग ५

दक्खन के चबूतरे कूर्ग में परिवार था बसा,उत्तर के काशीपुर शहर का था रहनेवाला,मां पिता इक बेटी इक बेटे का संसार उनका,जंगल संरक्षण विभाग में …

नंदिनी : मुख़्तलिफ़ अंदाज़!!! भाग ४

प्रणय को लगता था कि ज़िंदगी,हर वक़्त गुलज़ार होने को हुई,पढ़ाई में उसका मन लगता था कम,कभी कभी वो घूमने निकलता इकदम,साथ दोस्तों के ख़ुद …

नंदिनी : सफ़र का आग़ाज़!!! भाग ३

प्रणय की शिक्षा शुरू हुई बनबसा से,आगे की पढ़ाई की उसने नैनीताल से,बारहवीं की थी बिड़ला विद्या मंदिर से,कला की पढ़ाई कुमाऊं विश्वविद्यालय से,उसको पहाड़ …

नंदिनी : और परिचय!!! भाग २

समग्र चरित्र निवासिनी,तन मन से सुंदर नंदिनी,स्वयं में वो परिपूर्ण थी,इच्छायें उसकी बढ़ रही,जवानी उसपर चढ़ रही,ज़िंदगी से भरपूर वो थी,मां पिता के बीच संबंधों …

नंदिनी : परिचय!!! भाग १

बेरीनाग की सुंदर अनारकली,अल्मोड़ा में थी वो पली बढ़ी,बचपन से थी अत्यंत चुलबुली,पैर ना टिकते थे एक भी घड़ी,उछल कूद मौज मस्ती थी बड़ी,उसको प्यारा …