बसंती बसंत !!!
बसंती बसंत आया,गुलिस्ताँ मुस्कुराया,मस्त सुगंध मिट्टी से,सारा आलम भर आया, अमृत वर्षा चौतरफ़ा,हर पत्ता है लहरा रहा,हर टहनी यूँ झूम रही,लगे बसन्त पगला रहा, आसमाँ …
बसंती बसंत आया,गुलिस्ताँ मुस्कुराया,मस्त सुगंध मिट्टी से,सारा आलम भर आया, अमृत वर्षा चौतरफ़ा,हर पत्ता है लहरा रहा,हर टहनी यूँ झूम रही,लगे बसन्त पगला रहा, आसमाँ …
कल शाम, कल रात से बात हुई,सोचती रही रात मगर नहीं सोयी,वक़्त था तक़रीबन रात के ढाई,अल्लाह दुहाई अल्लाह दुहाई,नींद आ कर भी नहीं आई,सख़्त …
कल दोपहर बाद,शाम ने,महफ़िल थी सजायी,दिन अच्छा ख़ासा दूर था,सुबह ज़रा क़रीब थी और,रात इठलाते हुए थी आई… कल शाम जब,महफ़िल में,रात होने को शामिल …
नंदिनी व प्रणय ने इस भरी बारिश में,इकदूजे को संभाला और घर को गये,दोनों ही थे घायल दोनों ही भीगे हुए,बूढ़ी अम्मा ने गर्म पानी …
अब बहुत दूर आ गया प्रणय चलते चलते,जान तो थी पर पैर उसके अब थक से रहे,पहाड़ों में जबतक चलते रहो ठंड नहीं लगती,थोड़ा रुको …
नंदिनी अनिभिज्ञ की प्रणय है दादी के साथ,भाई के साथ जाने को हुई वो खजूरी खास,दो ढाई घंटे में पहुंच जाएगी वो दादी पास,उसे क्या …
कोई बात होती ही होगी मुहब्बत में,जागते हुए सोते नींद में जागते रहते,जबसे लगी है बला मज़ा ही अलग है,इस बेचैनी की ना दवा ना …
क़रीब दस बारह महीने निकल चुके थे,प्रणय और नंदिनी के बीच सम्पर्क हुए,नंदिनी भी लगी हुई थी अपने काम में,महीना था मई का गर्मी थी …
अभी भी बातें आंखों में चल रहीं थी,नंदिनी कहने को हुई फिर चुप रही,दादी के घर से चल तो पड़े थे दोनों,पर जाएंगें प्रणय के …
तय हुआ कि नंदिनी जाएगी दादी घर,प्रणय ने कहा चलो चलें अब उधर,बात दोनों की फंसी हुई थी अधर,क्या जाने क़िस्मत ले जाएगी किधर,जीप चलाते …