ज़िंदगी की सरजमीं पर...
Manu Sharad

नंदिनी : कहना है, कुछ सुनना है!!! भाग १९

प्रणय भी था परिपक्व बड़ा, कुछ नहीं बोला,उस घनेरे रास्ते में बस उसका मन रहता डोला,यक़ीन ख़ुद पर नंदिनी की बात सुनकर, आ गया,बिन बोले …

नंदिनी : कोई नाम ना दो!!! भाग १८

चार बजने को आये जब प्रणय ने पूछा,बाक़ी सब तो ठीक है जा रही थी कहां,यही सवाल नंदिनी के मन में भी गूंजा,पर प्रणय के …

नंदिनी : ऐसा भी होता है!!! भाग १७

आदित्य के जाने के बाद वो सोचती रही,क्या उसका व्यवहार ज़रा ठीक था नहीं,आख़िर दोस्ती में कोई बुराई तो नहीं,और है भी आदित्य बड़ा पदाधिकारी,हालांकि …

नंदिनी : उलझन सुलझे ना!!! भाग १६

“ख़त खुला मजमून पढ़ा ज़िंदगी गुलज़ार,नंदिनी की नींद उड़ी, क्या ये था चमत्कार,” नंदिनी ने क़रीने से खोला ख़त कुछ ऐसे,जैसे प्रणय निकल आएगा उसमें …

नंदिनी : ख़तों की इबारत!!! भाग १५

क्या बात छिड़ी झंकृत हुए तार दिल के,प्रणय नंदिनी से कह रहा याद ये कर के,उस दिन जब हम नैनीताल में थे मिले,क्या पता था …

नंदिनी : दरख़्त की छाँव!!! भाग १४

क्या हुआ उस रात को उसे ना पता चला,वो सरल हृदय ढूंढने में नंदिनी को लगा रहा,ये उसका भृम था या सच या था सपना,यही …

नंदिनी : खिले हुए बुग्याल!!! भाग १३

मिल के यहां प्रणय से उसका है क्या हाल,मुक्तेश्वर में रहता उन्मुक्त घूमता बुग्याल,कुमाऊं का कोई स्थान उसने नहीं छोड़ा था,हिम भूखंडों में खेलना अच्छा …

नंदिनी : मुहब्बत की पेंग!!! भाग १२

नंदिनी सोच रही थी अब वापस जाने की,मन में फ़ितरत थी वहीं समय बिताने की,अजीब ओ ग़रीब असमंजस की घड़ी थी,क्या करे क्या ना करे …

नंदिनी : दादी घर!!! भाग १०

बेरीनाग से आया तार, दादी बीमार,याद तिहारी आ आ के बेचैन बेहाल,दादी का घर पाषाण युग सा सुंदर,वहां घूमते लाल मुंह वाले ढेरों बंदर,दादा दादी …