सिफ़र!!!
माथे पर, सिफ़र ठहरा,चांदबाली सा लहरा रहा,बढ़कर रुख़सार चूमता,हो सुर्ख़, कभी दमकता, सिफ़र से सफ़र शुरू हुआ,सिफ़र से बने है कहकशां,सिफ़र से कम, चश्म जमा,ऊपर …
माथे पर, सिफ़र ठहरा,चांदबाली सा लहरा रहा,बढ़कर रुख़सार चूमता,हो सुर्ख़, कभी दमकता, सिफ़र से सफ़र शुरू हुआ,सिफ़र से बने है कहकशां,सिफ़र से कम, चश्म जमा,ऊपर …
जिंदगी ब्याज पे और प्याज पे चलती है,छौंके साथ में लौकी आलू मेथी बनती है, आलू रोजमर्रा की दिनचर्या की सब्जी है,बाकी सब्जियां उसी में …
जग चेतन तुम,मन चिंतन तुम,कण कण तुम,हर क्षण तुम, शून्य में तुम,मौन में तुम,असंख्य तुम,अखण्ड तुम, शंखनाद तुम,अंतर मन कीआवाज़ तुम,आग़ाज़ तुम, पार्थ तुम,निस्वार्थ तुम,सुदर्शन …
वक़्त से प्यार परवान है चढ़ रहा,कोई है दीवाना और कोई बन रहा,नफ़रत से मुहब्बत जागती है बाबू,ना बोईये ज़्यादे कि अरमान बढ़ रहा… बोलिये …
सैलाब गुज़र रहे ज़ायका क़लियों से,बुलबुले फूट रहे, फ़रमाने को चंद चीज़ें, फ़िरनी, गुलाब जामुन या हो रसगुल्ले,ज़ायक़ा क़लियों की ऐठन हैं मिटा देते, अबकी …
ज़िंदगी का बंदर,दिखता है बाहर,रहे चित्त अंदर,हाय रे ये बंदर…मन को खींचकर,आंख को भींचकर,चाहता नहीं देखना,वीभत्स होती नज़र,लगा बुलाने चीख़कर,अपने अंदर का बंदर,वो खींसे निपोड़ …
कैनवास पे रंगों के छींटे यूं हैं उड़ेले,के ज़िंदगी ने कहा चलो इनमें रंग भरें, आबशारों को देख रहे उल्टे पड़े हुए,लगे के जैसे आसमां …
लगातार सिलसिलेवार कहानी,सिलवटें लगी शानदार कहानी,बुर्राख़ क़मीज़ जानदार कहानी,लगता ये है ईमानदार कहानी, गरेबां झांकती पहरेदार कहानी,करिश्मे दिखाती उम्रदार कहानी,हर रोज़ मांजती चमकदार कहानी,देखो है …
जल को पता ही ना चला,जाने कब बर्फ़ बन ढल गया, शायद ग़फ़लत में रहा होगा,जब जम गया तब थम गया, मारने चाहे हाथ पैर, …
ना बरसे फाल्गुन फुहार,बिखरे ना हीं रंग बौछार,ना गाये होरी मेघ मल्हार,बिनती करे हैं कन्हैया से,तुम्हरी राधा तुम्हरा इंतजार,औ मन ही मन बैठी हैं ठान… …