नफ़ासत!!!
क्या ख़ूब सोचकर भेजी ज़िंदा वो तस्वीर,मुहब्बत की जीती जागती उम्दा वो तस्वीर, बे इंतेहा तड़प के साथ ये कह रही तस्वीर,हर सितम पर मुस्कुराती …
क्या ख़ूब सोचकर भेजी ज़िंदा वो तस्वीर,मुहब्बत की जीती जागती उम्दा वो तस्वीर, बे इंतेहा तड़प के साथ ये कह रही तस्वीर,हर सितम पर मुस्कुराती …
कुछ कम रह गया, कम रह ही है जाता, कम रहना है पूरा होने के तरफ़ का इशारा…मगर कभी पूरा नहीं हो पाता। कम होना …
करने लगे सजदा,धीमे से आवाज़ आई,ऊपरवाला ऊपर रहता,उठ खड़े हुए फ़ौरन,दोनों हाथ उठा कर,मांगने लगे दुआ… चल रहा रतजगा,कर्कश ध्वनि में,चीख चीख बताते व्यथा,हो हल्ला …
सामाजिक व्यवस्थाओं के बीच रह कर मध्यमवर्गीय समूहों की विवेचनात्मक अवस्था चरमराती सी दिखती है.…मगर ऐसा है नहीं…इक नई चेतना अपने पैर पसार रही है …
दर्जनों में दर्द,सैकड़ों में ख़ुशी,जो कुछ बची,ज़िंदगी ही होगी… आसमाँ बिछा कर,चादरें समेट लीं,पैर पसारने की,जगह नहीँ छोड़ी… पी गये हैं दरिया,समंदर है बाक़ी,छोटे से …
ख़ुश हूँ तो सज़ा हूँ,रोता हूँ तो ख़ुदा हूँ,दिलचस्प शह है ये,ख़ूब जी रहा हूँ, दर्द हूँ, अहसास हूँ,आती जाती साँस हूँ,कभी कभी तो लगता,अपनी …
दिवस आज है माँ का, तो कल दिवस था किसका और कल दिवस होगा किसका…और उसके पीछे के पल और आगे आने वाले कल, क्या …
ये साये हैं परछाइयों के,ये पाये(पैर) हैं गहराइयों के,बड़ी देर से ढूढ़ें उचाईयों को,यहां साये कतराते हैं रुसवाइयों से … ये साये हैं….. ये रास्ते …
किसी चेहरे पे क़शिश ऐसी पाई,ज़हन में उतरी, ज़िंदगी मिल गयी, जिनसे मिले, परछाईं दिखे उनकी,मिले उनसे तो दुनिया खिल गयी, आग़ोश में दम टूटता …
ज़िंदगी ज़रा देर जो बैठी सुस्ताने,लगी उठने तो पैर लगे कँपकपाने, उसने भरोसा दिलाया इत्मिनान से,कराहना छोड़ कर लगी मुस्कुराने, यक़ीं पर गर्द जल्द बैठ …