सूरत बनी बचपन से!!!
छवि जो बन जाती है बचपन में,उम्र भर वो चलती है संग संग में, मालूम होता नहीं हमें बचपन में,हवाला दिया जाता है पचपन में, …
छवि जो बन जाती है बचपन में,उम्र भर वो चलती है संग संग में, मालूम होता नहीं हमें बचपन में,हवाला दिया जाता है पचपन में, …
ख़यालों की ग़ुलामी से हों आज़ाद,हो रही हो बुलंद हमारी आवाज़,अंदर धधकती सी हो हमारे आग,जिस वजह से सोते से जायें जाग, तो हम असल …
चुभते अहसासों ने आ घेरा,नम आंखों ने बरसना चाहा,यूं चश्मे सा बह जाना चाहा,मासूम इक अश्क़ बहा दिया, वो दर्द था जो मुस्कुरा दिया… टीस …
जिस दम आज़ाद ख़याल बयां हुआ,मैं परेशानी का सबब, मेरी जाँ हुआ, अच्छा था जब, ढका छुपा था सब,राज़ नाज़िर हुआ, मैं बदनाम हुआ, ख़ता …
तरबियत थी ही ऐसी के अब क्या कहूं,मैं अपनी ज़िंदगी को ख़ुद ही आसां हुआ, अक़्सर ही हलक़ में फँस जाती है सांसें,जज़्बाती सैलाब हावी …
आजकल इक घर में, कई घर हैं बसते,हैं मुख़्तलिफ़ जहाँ, घर के हर कमरे में, अक़्सर, बहस में बदल जाती हैं बातें,हो पाती नहीं गुफ़्तुगू, …
तेरे जैसा नहीं कोई, रखना यक़ीं चाहिये,जो तू कहना चाहे खुल के कहना चाहिये, वजूद तेरा इसलिए नहीं के रहे बंध के,ग़र हो मंज़ूर, बंधन …
ज़िंदगी गुज़र रही अब ग़म में तेरे,घाव भी हुए थे क़ाफ़ी गहरे गहरे, जब साथ थे तो ग़म थे साथ के,अलग हुए तो जाना, बिन …
उन्हें मग़्फ़िरत की हैं चाहतें,अदाक़ारी हमसे फ़रमाते हैं, लफ़्ज़ों को ग़र छोटे में ना देखें,क्या ख़ूबसूरत बला चाहते हैं, वो जान गए हम साथ हैं …
कभी यूँभी हुआ है मुहब्बत के थाने में,उन्हीं के हो गये हम उनको रंग लगाने में, गुजिया और मिठाई की बातें बनाने में,साँवली सूरत पर …