आसमां से गहरी!!!
आसमां से गहरी समंदर से ऊंची,हाय, ये परेशानियां हैं कैसी कैसी, कहीं सुलझी हुई कहीं मसनुई सी,सीधी उलझी सुबहें अच्छी लगती, उसने कहा ज़मीं तौल …
आसमां से गहरी समंदर से ऊंची,हाय, ये परेशानियां हैं कैसी कैसी, कहीं सुलझी हुई कहीं मसनुई सी,सीधी उलझी सुबहें अच्छी लगती, उसने कहा ज़मीं तौल …
आगमन में राम के,तप कितने धाम के,पथ नहीं आराम के,जप है राम राम के,रावण हृदय मार के,स्वछंद हृदय वास रे,राम राम सियाराम रे,राम लखन हनुमान …
बीच अपनों के ही, तन्हां मैं रह गया,टुकड़ा बादल सा, छिटका मैं रह गया, ज़िंदगी खड़ी सामने हंसता मैं रह गया,चाहने वाले कहते, मुझे रोता …
अवधपुरी से आई रे “गुजरिया”,इंद्रप्रस्थ से आया रे “सांवरिया”,मिलन ये कैसा अद्भुत रसिया,होरी मुबारक़, चखिये गुजिया, आज अवध की होरी है रसिया,उड़त गुलाल रंग भरे …
शाइस्ता ही सही आहिस्ता ही सही,करती रहना हैराँ, हर रोज़ ए ज़िंदगी, कभी रूठना, मान जाना भी कभी,चाह के हमें मनाती रहना ए ज़िंदगी, यूँही …
बावले से दिन, बावली सी रात हैहम साथ साथ, गज़ब की बात है , उम्र बराबर, साल गुज़ारे हैं हमने,फिर भी लगे यूं, कल की …
रेत, जो लहरों में बह के बाहर आ गयी,ना ज़मीं की हुई ना समंदर में समा सकी, किनारे रेत-क़तरे पैरों तले फिसलते रहे,नाज़ुक सी ज़मीं …
जल वायु अग्नि आकाश धरा,कण कण ऊर्जा संचार हो रहा,असीमित व्यापक विचारधारा,ये धरा है धरोहर की रंगशाला,अनूठा है बाल अनूठी है बाला,हज़ारों साल से गणतंत्र …
रेत के टीलों का पहाड़ बना डाला,लगा जो धसने, बवाल मचा डाला, पत्थर को तौलते हो रेत से मगर,घिस घिस उसे रेतीला बना डाला, घर …
बर्फ़ के फ़ोहे,पलकों पे ठहरे,कितने सुंदर हैं,दृश्य ये सुनहरे, इस रचना मेंखोये ना कैसे,तारीख़ बदली,नया कुछ करने, नये हैं नज़रिये,नये हैं फ़लसफ़े,पुराने बने नये,नई शुरुआत …