खेल डर का!!!
डरो के डरने का मौसम है…हरदम ये तौलते रहो कि किसमें कितना दम है… कोख में थे तो माँ डरी हुई थी, ठीक ठाक तंदुरुस्त …
डरो के डरने का मौसम है…हरदम ये तौलते रहो कि किसमें कितना दम है… कोख में थे तो माँ डरी हुई थी, ठीक ठाक तंदुरुस्त …
जो ग़ुबार बन रहे थे कहीं,जो गर्द बन उड़ रहे थे कहींजो नहीं संभल रहे थे कहीं,दश्त में ख़्वाब बोये थे कभी, इनायत उनकी कुछ …
मौलिक विचारों की पैदाईश भी जन्म के साथ ही हो जाती होगी, ऐसा मेरा मानना है…अब होता है ऐसा कि नहीं ये तो शोध का …
हर पारम्परिक बड़े से परिवार में इक ना इक बच्चा घोंघा होता है।घोंघा समझे आप? नहीं ना, रुकिये हम समझाते हैं। अरे वही जो बरसातों …
ख़बर है ये, कि ये ख़बर है ख़ास,वक़्त हो बुरा, क्या कीजिये जनाब,कैसे चले पता कि वक़्त है ख़राब,वक़्त के तो होते नहीं कोई जज़्बात, …
कुछ क़वा’इदें साथ हैं ज़िंदगी के,कुछ मान्यताएं इंसा ख़ुद है बनाता, वक़्त, उम्र बताने से बाज़ नहीं आता,बेल के जैसे शरीर पर चढ़ता जाता, और …
अंजानी हूं,जानी जा रही हूं ,निर्भीक हूं,पहचान बना रही हूं,खोज हूं,ढूंढी जा रही हूं,श्वास हूं,जीवंत कहला रही हूं,स्पंन्दन हूं,कंपन्न बढ़ा रही हूं,दृश्य हूं,दृष्टा बनना चाह …
ओस ठहरी टहनी पर,टहनी लोच से भर गयी,ज़रा सी हलचल हुई,ओस ज़मीं पे टिक गयी, ज़मीं भी लगी कहने,ठंड में क्यों कुड़क रही,ओस ने फिर …
पानी पे पांव के निशा चाहते हैं,ख़ुद से ना जाने हम क्या चाहते हैं ख्वाहिशें बेहिसाब के क्या कहें,उसी में रचा बसा औ गुंधा चाहते …
उसने कहा अपने घर आ कर,कि मैं अपने घर से आ रही हूं,मुझे दो पल लेने दो सुकूं ज़रा,बेहद थकी हूं, टूट के आ रही …